पश्चिमी चंपारण। भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन कर रही 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) नरकटियागंज ने मंगलवार को सीमावर्ती गांवों में नि:शुल्क मानव एवं पशु चिकित्सा शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को बड़ी राहत पहुंचाई। कमांडेंट बलवंत सिंह नेगी के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान में सैकड़ों लोगों और पशुपालकों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत वाहिनी मुख्यालय के कार्यक्षेत्र वाइब्रेंट विलेज "डी" समवाय के मंगूराहा गांव और "जी" समवाय के कैरी गांव में नि:शुल्क पशु चिकित्सा शिविर लगाया गया। शिविर के दौरान कुल 835 पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। इस अभियान से 60 पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। पशु चिकित्सा अधिकारी एवं सहायक कमांडेंट विनीत कुमार (क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी, बेतिया) ने पशुओं की जांच कर आवश्यक दवाइयों का नि:शुल्क वितरण किया। उन्होंने पशुपालकों को पशुओं के बेहतर रखरखाव, समय पर टीकाकरण और बीमारियों से बचाव के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इसी क्रम में "बी" समवाय नगरदेही के अंतर्गत बाह्य सीमा चौकी भंगहा के भंगहा बाजार में नि:शुल्क मानव चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 92 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें 50 पुरुष, 28 महिलाएं और 14 बच्चे शामिल रहे। चिकित्सा अधिकारी एवं सहायक कमांडेंट कुंदन जायसवाल ने मरीजों की जांच कर आवश्यक दवाइयां मुफ्त उपलब्ध कराईं। साथ ही ग्रामीणों को संतुलित आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक किया।
शिविर के सफल संचालन में सहायक कमांडेंट परिमल कुमार मंडल, तरुण कुमार यादव, निरीक्षक (सामान्य) प्रवीण कुमार, सहायक उपनिरीक्षक राजेश कुमार तोमर, राजकुमार सिंह, मुख्य आरक्षी (वेटी) योगेंद्र कुमार, मुख्य आरक्षी (मेडिक्स) राजेश कुमार, आरक्षी (वेटी) प्रदीप कुमार सहित एसएसबी के कई जवान मौजूद रहे।

एसएसबी अधिकारियों ने बताया कि नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह के चिकित्सा शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। इन अभियानों से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उनके गांव तक उपलब्ध हो रही हैं, वहीं पशुपालकों को भी समय पर उपचार मिलने से उनकी आजीविका को मजबूती मिल रही है। स्थानीय लोगों ने एसएसबी की इस पहल की सराहना करते हुए ऐसे शिविरों के नियमित आयोजन की मांग की।














