बेतिया। पश्चिम चंपारण मुख्यालय बेतिया में शुक्रवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) के बैनर तले राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत नीट (NEET) पेपर लीक मामले, आंदोलनरत छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, मुकदमे दर्ज किए जाने और गिरफ्तारियों के विरोध में विशाल प्रतिरोध मार्च निकाला गया। शहीद पार्क से शुरू हुआ यह मार्च शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए जिला पदाधिकारी कार्यालय पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और पुलिस बल को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया।

मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-युवा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान "शिक्षा बचाओ–भविष्य बचाओ", "पेपर लीक बंद करो", "छात्रों पर दमन बंद करो", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" और "गिरफ्तार छात्रों को रिहा करो" जैसे नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को बुलंद किया। AISF और AIYF के नेताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक की घटना ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना था कि परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज, मुकदमे और गिरफ्तारियां लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत हैं। संगठनों का आरोप है कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों को बिना शर्त रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने तथा कथित लाठीचार्ज की न्यायिक जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई।
संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय नहीं बनेगी, तब तक छात्रों का भरोसा बहाल नहीं हो सकेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की, जिससे भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

जिला पदाधिकारी कार्यालय पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और मांगों पर उचित कार्रवाई की अपेक्षा जताई। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। छात्र-युवा नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की व्यापक लड़ाई का हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।













