पश्चिमी चंपारण। खरीफ फसल के मौसम में किसानों को निर्धारित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से पश्चिम चंपारण कृषि विभाग ने बुधवार को सिकटा प्रखंड में विशेष अभियान चलाया। जिला कृषि पदाधिकारी सरफराज असगर के नेतृत्व में विभिन्न उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान दुकानों में यूरिया की उपलब्धता, स्टॉक, बिक्री व्यवस्था और किसानों को दिए जा रहे उर्वरक की स्थिति की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी ने दुकानों पर मौजूद किसानों से सीधे बातचीत कर फीडबैक लिया। किसानों से पूछा गया कि उन्हें निर्धारित सरकारी मूल्य पर यूरिया मिल रहा है या नहीं तथा किसी प्रकार की अतिरिक्त राशि या अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव तो नहीं बनाया जा रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसानों को केवल निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए और किसी भी स्थिति में यूरिया के साथ कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक तत्व या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए।

जिला कृषि पदाधिकारी ने सभी खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिया कि सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन करें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी दुकान पर यूरिया की कालाबाजारी, जमाखोरी, अधिक कीमत वसूलने या जबरन टैगिंग की शिकायत सही पाई गई तो संबंधित लाइसेंसधारी के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के बाद सिकटा के सीमावर्ती क्षेत्रों में यूरिया की संभावित तस्करी को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक भी की। बैठक में सीमा क्षेत्रों से उर्वरक की अवैध आवाजाही रोकने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और संयुक्त निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। एसएसबी से सीमा पर नियमित निगरानी और आवश्यक कार्रवाई में सहयोग का अनुरोध किया गया। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया बेचा जा रहा हो, जबरन अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जा रहा हो या कालाबाजारी की सूचना मिले तो इसकी जानकारी तत्काल कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। विभाग ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से समझौता करने वालों के खिलाफ आगे भी लगातार छापेमारी अभियान जारी रहेगा।













