सैकड़ों किसानों ने मल्टीलेयर फार्मिंग का किया निरीक्षण
भारत एक गांवों का देश है, 80प्रतिशत लोग खेती किसानी से उनकी जीविका चलती है.
मझौलिया।प्रति इकाई क्षेत्रफल से अधिक लाभ एवं कम जोखिम में खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में "मल्टी लेयर फार्मिंग" विषय पर एक प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मल्टीलेयर खेती के महत्व के बारे में जागरूक करना था, ताकि वे इसे अपनाकर प्रति इकाई क्षेत्रफल से अधिक लाभ प्राप्त करने के साथ-साथ लागत में कमी करके टिकाऊ खेती की ओर अग्रसर हो सकें।डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर ने बताया कि
कीट-रोग में कमी: फसल विविधता के कारण कीट एक जगह नहीं टिकते, जिससे दवा का खर्च बचता है। डॉ. सिंह ने बुवाई के टिप्स भी दिए। उन्होंने कहा कि जुलाई में लगाई गई फसल से अक्टूबर तक 3 बार तुड़ाई संभव है। धूप चाहने वाली सब्जी को मेड़ पर लगाएं। बरसात में जलजमाव न हो इसके लिए 2 फीट ऊंची मेड़ बनाएं और पानी निकासी की उचित व्यवस्था रखें। डॉ. सौरभ दुबे, वैज्ञानिक, पौध संरक्षण ने बताया कि आज समय की मांग है कि इस तरह की खेती को किसानों के बीच बढ़ावा दिया जाए। वर्मी कम्पोस्ट + नीम खली जैसी जैविक खाद के उपयोग से लागत कम होगी और बाजार में अच्छा भाव मिलेगा। केंद्र के कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक डॉ चेलपुरी रामलू ने बताया कि इस खेती में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली वह भी अपनाया जा सकता है जिससे पानी एवं आवश्यक पोषक तत्वों में 15 से 20% मात्रा कम करके उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर अफरोज आलम, परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षक एवं विकास संस्थान बेतिया ने बताया कि अमवा मजार पंचायत के चौराहा संस्था द्वारा बीज और उपादान के द्वारा किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है।













