बेतिया। पश्चिम चम्पारण जिले के गौनाहा प्रखंड की गौनाहा पंचायत ने ग्रामीण स्वच्छता के क्षेत्र में ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) को प्रभावी ढंग से लागू कर पंचायत ने न केवल गांवों को स्वच्छ बनाया है, बल्कि कचरे को आय के स्रोत में बदलने का भी सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। बेहतर प्रबंधन, जनभागीदारी और पंचायत की सतत निगरानी के कारण गौनाहा अब अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है।

गौनाहा पंचायत के सभी 17 वार्डों में एक-एक स्वच्छता कर्मी की तैनाती की गई है। ये कर्मी प्रतिदिन पंचायत के 2,656 घरों से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करते हैं। घरों से एकत्रित कचरे को वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट (WPU) तक पहुंचाया जाता है, जहां जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग कर वैज्ञानिक तरीके से उसका निष्पादन किया जाता है। पंचायत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक जैविक कचरे से तैयार की जा रही उच्च गुणवत्ता वाली खाद है। इस खाद का उपयोग वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट परिसर में विकसित आकर्षक मिनी गार्डन में किया जा रहा है। वहीं प्लास्टिक और अन्य अजैविक कचरे का पुनर्चक्रण कर सजावटी एवं उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा रही हैं। "कचरे से कंचन" की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीणों को संसाधनों के पुनः उपयोग का संदेश भी दे रही है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ पंचायत ने तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर भी समान रूप से ध्यान दिया है। पंचायत क्षेत्र में 114 सोख्ता गड्ढों का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा सभी वार्डों में नालियों का जाल बिछाया गया है, जिससे घरों से निकलने वाले गंदे पानी का समुचित निस्तारण हो रहा है। इस व्यवस्था से जलजमाव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है और गांवों का वातावरण पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बना है।

स्वच्छता सुविधाओं को सभी वर्गों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पंचायत में दो सामुदायिक स्वच्छता परिसर (सीएससी) भी बनाए गए हैं। इनका लाभ विशेष रूप से महादलित एवं भूमिहीन परिवारों को मिल रहा है। इससे खुले में शौच की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है और पंचायत के सभी गांव ODF Plus की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। गौनाहा पंचायत ने स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जैविक खाद की बिक्री और नियमित स्वच्छता शुल्क के माध्यम से पंचायत अब तक लगभग 61 हजार रुपये का राजस्व अर्जित कर चुकी है। इस राशि का उपयोग स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किया जा रहा है।

गौनाहा पंचायत की सफलता यह साबित करती है कि यदि योजनाओं का सही क्रियान्वयन, जनसहभागिता और स्थानीय स्तर पर प्रभावी नेतृत्व मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छता का स्थायी मॉडल विकसित किया जा सकता है। आज यह पंचायत पश्चिम चम्पारण ही नहीं, बल्कि बिहार की अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है। ग्रामीण स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का यह मॉडल भविष्य में कई पंचायतों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है।














