बाल्मीकिनगर से सांसद सुनील कुमार ने लोकसभा में नियम 377 के तहत लोक महत्व का मामला उठाते हुए सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा बाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क एवं पुल परियोजनाओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सांसद ने कहा कि सरकार पहले योजनाओं को स्वीकृति देती है, फिर बाद में उन्हें रद्द कर देती है या ठंडे बस्ते में डाल देती है।
उन्होंने बगहा और उत्तर प्रदेश के जटहा घाट के सामने पुल-सह-सड़क निर्माण की मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने पहले लोकसभा में बगहा के शास्त्रीनगर और यूपी के बेलवनिया के बीच पुल निर्माण के लिए डीपीआर तैयार होने की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में ट्रैफिक स्टडी, अधिक लागत और निकट में पुल होने का हवाला देकर योजना निरस्त कर दी। उनका कहना था कि ऐसे सभी पहलुओं की जांच योजना स्वीकृत होने से पहले होनी चाहिए थी।
सुनील कुमार ने बेतिया-बगहा फोरलेन परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले इस परियोजना का एलाइनमेंट स्वीकृत कर डीपीआर तैयार करने के लिए एजेंसी नियुक्त की थी। अब मंत्रालय की ओर से लिखित जानकारी दी गई है कि छपवा-बेतिया फोरलेन और गोरखपुर एक्सप्रेसवे का कार्य पूरा होने तक बेतिया से आगे राष्ट्रीय राजमार्ग की किसी नई योजना पर काम नहीं होगा। सांसद ने इसे बाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की जनता में गहरी निराशा है।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप और संरक्षण की मांग करते हुए सरकार से क्षेत्र की लंबित परियोजनाओं पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया।



















