बगहा। प्रखंड बगहा-1 के पंचायत राज छोटी पट्टी बड़गांव के वार्ड संख्या-02 स्थित एकडेरवा गांव में समेकित बाल विकास परियोजना के केंद्र संख्या-73 पर मंगलवार को ग्रामीणों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने केंद्र पर बच्चों का सही तरीके से नामांकन नहीं किए जाने और पोषाहार वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया। विरोध के दौरान केंद्र की व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखने को मिली।
ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र पर पात्र बच्चों को योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। पोषाहार वितरण में भी मनमानी की जा रही है। विरोध करने वालों में बबली कुमारी, उमेश राम समेत अन्य ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

वहीं, आंगनबाड़ी सेविका सुनीता देवी ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग अपनी परेशानी सामने रखी। उन्होंने बताया कि केंद्र पर निर्धारित संख्या के अनुसार 40 बच्चों को पोषाहार देना है, जिसमें 12 अतिकुपोषित और 28 कुपोषित बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा आठ धात्री और आठ गर्भवती महिलाओं को भी पोषाहार देने का प्रावधान है। सेविका ने बताया कि केंद्र क्षेत्र की आबादी करीब 250 है। उनके अनुसार गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए पोषण का प्रावधान समान होने के कारण वितरण में व्यावहारिक परेशानी आती है।

उनका कहना है कि जब एक ही परिवार में कई बच्चे पोषाहार के लिए आते हैं तो निर्धारित मात्रा में सभी को लाभ देना मुश्किल हो जाता है।
सेविका ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अपनी बात रखने पर उन्हें मारने की धमकी दी जा रही है और उनसे रिश्वत की मांग भी की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे चावल-दाल देने की मांग की जाती है। परेशान सेविका ने यहां तक कहा कि वह आंगनबाड़ी केंद्र की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहती हैं और नौकरी छोड़ने पर विचार कर रही हैं। सुनीता देवी का कहना है कि निर्धारित लाभार्थियों को बुलाकर पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।
हालांकि, ग्रामीणों की शिकायतों और सेविका के आरोपों ने केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में प्रखंड बगहा-1 के सीडीपीओ प्रशांत झा ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि केंद्र पर पोषाहार वितरण और नामांकन में वास्तव में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है।


















