बगहा। पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल के मधुबनी प्रखंड की चिउरही पंचायत के रेवहिया गांव में गंडक नदी का कटाव लगातार विकराल होता जा रहा है। पहले नदी ने किसानों की उपजाऊ जमीन निगली, फिर कई घरों को अपनी धारा में समेट लिया। अब राजकीय प्राथमिक विद्यालय भी कटाव की चपेट में आ गया है। विद्यालय भवन का करीब आधा हिस्सा नदी में समा चुका है और बचे हिस्से पर भी खतरा मंडरा रहा है।
आशियाना बचाना मुश्किल, सामान समेटने को मजबूर ग्रामीण

गंडक की तेज धारा को देखते हुए ग्रामीण अब अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। जिन घरों को लोगों ने वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से बनाया था, उन्हें अब अपने ही हाथों से हटाने की मजबूरी सामने आ गई है। गांव में दहशत का माहौल है।
विद्यालय भवन को बचाने की उम्मीद भी कमजोर पड़ती दिख रही है। कमरों के दरवाजे और खिड़कियां तक तोड़कर बाहर निकाली जा रही हैं, ताकि नदी में समाने से पहले सामान को सुरक्षित किया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय आज बचा है, लेकिन कल तक सुरक्षित रहेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

कटाव रोकने के लिए जल संसाधन विभाग ने जियो बैग और अन्य सामग्री मौके पर पहुंचाई है। विभाग की ओर से कटावरोधी कार्य भी शुरू किया गया है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक नदी की तेज धारा में जियो बैग बह जा रहे हैं। इससे सरकारी बचाव कार्य की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि रेवहिया में पिछले वर्ष से कटाव जारी है। इसके बावजूद स्थायी और मजबूत कटावरोधी उपाय नहीं किए गए। उनका कहना है कि समय रहते पुख्ता काम कराया जाता तो विद्यालय और गांव को इस हालत तक पहुंचने से बचाया जा सकता था। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के बाद पैक्स गोदाम और नल-जल योजना की पानी टंकी पर भी कटाव का खतरा मंडरा रहा है। इससे गांव में संकट और गहराने की आशंका है।

इससे पहले राजकीय प्राथमिक विद्यालय चिउरही उर्दही उर्दू की पश्चिमी चारदीवारी भी नदी में समा चुकी है।

कटाव की सूचना पर मधुबनी बीडीओ सह बीईओ कुंदन कुमार, विधानसभा प्रत्याशी अर्थराज यादव और जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि जितेंद्र गुप्ता समेत कई लोग मौके पर पहुंचे। अर्थराज यादव ने विभागीय जेई से केवल जियो बैग डालने के बजाय प्रभावी और स्थायी उपाय करने की मांग की।

राजद किसान नेता ओम प्रकाश यादव ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार कटाव शुरू होने के बाद ही बोरा और बचाव सामग्री की व्यवस्था करती है। उन्होंने कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई। बीडीओ कुंदन कुमार ने कहा कि कटाव की गंभीर स्थिति से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। लेकिन सवाल यही है कि कार्रवाई कब होगी—जब तक रेवहिया का बचा-खुचा हिस्सा भी गंडक में समा न जाए?



















