बगहा। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर विकास वैभव चौराहा पर शुक्रवार को प्रकृति और वृक्षों के प्रति प्रेम, सम्मान एवं संरक्षण का संदेश देते हुए अनूठे ‘वृक्षबंधन’ पर्व का आयोजन किया गया। पर्यावरण साधक गजेन्द्र यादव के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में भाई-बहनों, बुजुर्गों, समाजसेवियों एवं पर्यावरणप्रेमियों ने वृक्षों को राखी बाँधकर उनकी रक्षा और संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते की रक्षा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवन की रक्षा का भी संदेश देता है। जिस प्रकार हम अपने प्रियजनों की सुरक्षा का वचन देते हैं, उसी प्रकार वृक्षों, वनों, जलस्रोतों, वन्यजीवों और संपूर्ण पर्यावरण की रक्षा भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
नेपाल में हाल में आई भयावह जलप्रलय और उससे हुई जन-धन एवं वन्यजीवों की क्षति का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने बढ़ते वैश्विक तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा, वनों के क्षरण और जैव-विविधता के संकट को गंभीर चुनौती बताते हुए अधिकाधिक पौधरोपण तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया।

वृक्षबंधन को संबोधित करते हुए पर्यावरण साधक गजेन्द्र यादव ने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन देने वाले साधन नहीं, बल्कि धरती के जीवन-तंत्र के आधार हैं। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमें प्राणवायु देने के साथ धरती को शीतलता प्रदान करते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित रखने, मिट्टी के संरक्षण तथा असंख्य जीव-जंतुओं को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा, “प्रकृति की रक्षा किसी पर उपकार नहीं, बल्कि अपने जीवन और भविष्य की रक्षा करना है।” वृक्ष को राखी बाँधने का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब लगाए गए पौधे को नियमित रूप से पानी दिया जाए, उसकी देखभाल की जाए और उसे वृक्ष बनने तक परिवार के सदस्य की तरह संरक्षण दिया जाए।

गजेन्द्र यादव ने कहा कि “एक पौधा लगाना शुरुआत है, उसे वृक्ष बनाना साधना है और वृक्षों की रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा धर्म है।” उन्होंने लोगों से जन्मदिन, विवाह, पर्व-त्योहार एवं अन्य शुभ अवसरों को पौधरोपण से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “एक व्यक्ति एक पौधा लगाए और एक पौधे की जिम्मेदारी ले” का संकल्प आने वाले समय में बड़े हरित आंदोलन का आधार बन सकता है।
उन्होंने युवाओं एवं बच्चों से विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण को जीवन का संस्कार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को केवल विकास की विरासत ही नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा, निर्मल जल, सुरक्षित वन और समृद्ध जैव-विविधता की विरासत देना भी हमारी जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने वृक्षों की रक्षा, जल संरक्षण, जंगलों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा तथा अधिकाधिक पौधरोपण का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर समाजसेवी शंभूनाथ शुक्ल, पूर्व शिक्षक रामसकल साह, कमलेश चतुर्वेदी, श्रवण राम, अंगद यादव, सुनील यादव, छोटेलाल राम, परम प्रकाश गुप्ता, प्रेम बिहारी कुशवाहा, गोल्डी कुमारी, अमिता कुमारी, नीरज मिश्रा, वेद प्रकाश यादव, ओमप्रकाश यादव, रागनी कुमारी, निधि कुमारी, निकु कुमार, नैना कुमारी, काजल कुमारी एवं रचना कुमारी सहित बड़ी संख्या में पर्यावरणप्रेमी एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


















