बगहा। महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा और सरकारी सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) बगहा-2 कार्यालय परिसर में "सखी" वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) बगहा-1, पश्चिम चंपारण की ओर से महिला जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला कर्मियों ने भाग लेकर महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) संगीता कुमारी, प्रधान लिपिक विकास कुमार, कार्यालय सहायक विवेक कुमार, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं, एलएस सहित अन्य महिला कर्मी उपस्थित रहीं। वक्ताओं ने कहा कि जागरूक महिला ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती है और समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत आधारशिला बनती है।

वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर श्वेता कुमारी ने महिला हेल्पलाइन-181 और वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, बाल विवाह, लैंगिक हिंसा, साइबर अपराध या अन्य उत्पीड़न की शिकार महिलाएं हेल्पलाइन-181 अथवा वन स्टॉप सेंटर से तत्काल और निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि किसी भी अन्याय या हिंसा को चुपचाप सहने के बजाय कानूनी और संस्थागत मदद लेने में संकोच न करें।

उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर समग्र सहायता उपलब्ध कराता है। यहां पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक परामर्श, सामाजिक सहयोग, चिकित्सकीय उपचार, कानूनी सहायता, पुलिस समन्वय तथा आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपने जीवन को फिर से सामान्य बना सकें।

कार्यक्रम के दौरान "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान पर भी विशेष चर्चा की गई। उपस्थित महिलाओं को बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और उनके सर्वांगीण विकास से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने महिला सशक्तिकरण से जुड़े ऐसे जागरूकता अभियानों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों और उपलब्ध सरकारी सेवाओं की जानकारी भी देते हैं। आयोजकों ने भी भविष्य में अधिक से अधिक महिलाओं तक जागरूकता अभियान पहुंचाने और उन्हें हर स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।



















