दोन (पश्चिम चंपारण)। कठिन परिस्थितियां और शारीरिक चुनौतियां भी उस व्यक्ति के इरादों को नहीं रोक सकतीं, जिसके भीतर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो। इसका जीवंत उदाहरण दोन क्षेत्र के निवासी एक दिव्यांग युवक हैं, जो एक हाथ और एक पैर नहीं होने के बावजूद मोटरसाइकिल से दूर-दराज के इलाकों में सामान पहुंचाकर अपना जीवनयापन कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार युवक रोजमर्रा की जरूरतों का सामान अपनी बाइक पर लादकर दोन के दुर्गम जंगलों, कच्ची सड़कों और नदी-नालों वाले रास्तों से होकर अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं। तस्वीर में भी देखा जा सकता है कि वह भारी सामान के साथ उबड़-खाबड़ रास्ते पर मोटरसाइकिल चलाते हुए नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां सामान्य व्यक्ति भी ऐसे रास्तों पर यात्रा करने से कतराते हैं, वहीं यह दिव्यांग युवक अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर हर दिन चुनौतियों का सामना करते हैं। उनका संघर्ष और आत्मनिर्भरता क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे जुझारू और मेहनती दिव्यांग व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं का लाभ देकर सम्मानित किया जाए, ताकि वे समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकें।
हौसले की उड़ान:
शारीरिक कमी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। दोन के इस दिव्यांग युवक ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के सामने बड़ी से बड़ी चुनौती भी छोटी पड़ जाती है।












