बगहा। अनुमंडलीय अस्पताल के नाम पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किए जाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। अस्पताल के रिकॉर्ड और ऑनलाइन पोर्टल से सत्यापन के दौरान दो जन्म प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने दोनों प्रमाण पत्रों की प्रतियां जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
वहीं, इस पूरे मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक एक हजार रुपये में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की बात करता सुनाई दे रहा है।मामला बथवरिया थाना क्षेत्र के मानपुर मकरी गांव निवासी सगीर आलम से जुड़ा है। सगीर अपनी पुत्री रफिया खातून और पुत्र आफिक आलम के जन्म प्रमाण पत्र लेकर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे थे। प्रमाण पत्र में रफिया खातून की जन्म तिथि 26 जनवरी 2023 और आफिक आलम की जन्म तिथि 23 जनवरी 2024 दर्ज थी।

सगीर आलम के अनुसार, बगहा कचहरी परिसर में उनकी मुलाकात एक युवक से हुई थी। युवक ने दोनों बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का भरोसा दिया। इसके लिए उसने सगीर से 1400 रुपये लिए और बाद में दोनों प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिए।

बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के दौरान प्रमाण पत्र में अस्पताल की अधिकृत मुहर नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद सगीर को प्रमाण पत्र पर संदेह हुआ और वह दोनों दस्तावेज लेकर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में रिकॉर्ड और ऑनलाइन पोर्टल से प्रमाण पत्रों का मिलान किया गया। सत्यापन के दौरान दोनों प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो वायरल हो रहा है।

इसमें एक युवक कथित तौर पर एक हजार रुपये में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की बात कह रहा है। अस्पताल कर्मी ने ग्राहक बनकर युवक से फोन पर बातचीत की तो कथित युवक ने उससे भी एक हजार रुपये की मांग की और कचहरी परिसर में मिलने को कहा। ऑडियो वायरल होने के बाद फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. ए.के. तिवारी ने बताया कि फर्जी पाए गए दोनों प्रमाण पत्रों की प्रतियां अस्पताल के पास उपलब्ध हैं। मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में भी बगहा अनुमंडलीय अस्पताल के नाम पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जाने का मामला सामने आया था। उस मामले में नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इसके बावजूद एक बार फिर अस्पताल के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र सामने आने से व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


















