बगहा। पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा नगर परिषद क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बगहा-1 अंचल प्रशासन ने गांधीनगर मोहल्ले में 25 लोगों को नोटिस जारी किया है। इन लोगों पर बगहा राइस मिल से सीताराम आश्रम तक सरकारी जमीन पर दुकान और भवन बनाकर अतिक्रमण करने का आरोप है। प्रशासन की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले अन्य लोगों में भी बेचैनी बढ़ गई है। राजस्व अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि कांग्रेस नेता फिरोज अंसारी द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर किया गया था। न्यायालय के निर्देश के बाद अंचल प्रशासन ने संबंधित स्थल का सर्वे कराया। सर्वे के दौरान कथित अतिक्रमणकारियों की पहचान की गई, जिसके बाद 25 लोगों को नोटिस जारी किया गया।

नोटिस मिलने के बाद बुधवार को सभी 25 लोग अंचल कार्यालय पहुंचे और अपना पक्ष रखते हुए भूमि से जुड़े दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए। अब राजस्व विभाग इन सभी अभिलेखों और कागजातों की विस्तृत जांच करेगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि संबंधित लोगों का दावा वैध है या सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों को बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम के तहत फॉर्म-2 में अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि को खाली कराया जाएगा। राजस्व अधिकारी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट के निर्देश और राजस्व नियमों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई नहीं होगी। सभी संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

हालांकि, प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिन स्थानों पर वर्षों से सरकारी भूमि पर निर्माण या कब्जे की शिकायतें हैं, वहां भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इससे ऐसे लोगों में चिंता बढ़ गई है, जो सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोपों का सामना कर रहे हैं। प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सर्वे, दस्तावेजों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में कब्जा अवैध पाया जाता है तो संबंधित निर्माण हटाकर सरकारी जमीन को मुक्त कराया जाएगा। वहीं, वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों के दावों पर भी निष्पक्ष तरीके से विचार किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कानून का पालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए अतिक्रमण के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।















