बगहा। पश्चिम चंपारण जिले के बगहा-2 प्रखंड परिसर में सोमवार को एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला। पटखौली थाना क्षेत्र के गुखलिया गांव निवासी संजय गौड़ अपने दिव्यांग (विकलांग) बेटे के साथ धरने पर बैठ गए और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। धरने के दौरान वह भावुक हो गए और आरोप लगाया कि कई महीनों से विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी शिकायत पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
संजय गौड़ ने अंचल अधिकारी को दिए गए आवेदन में बताया है कि वह मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उनके लिए लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाना बेहद कठिन हो गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 12 अप्रैल 2026 की शाम करीब चार बजे वह अपने पिता से पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से की जमीन की मांग कर रहे थे। इसी दौरान विवाद उत्पन्न हुआ और उनके साथ मारपीट की गई।
पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने पटखौली थाना में लिखित शिकायत दी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने वरीय पुलिस अधिकारियों से भी न्याय की गुहार लगाई। उनका आरोप है कि वहां से अंचल कार्यालय जाने की सलाह दी गई, जिसके बाद उन्होंने अंचल अधिकारी को भी आवेदन दिया। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली।

संजय गौड़ का आरोप है कि एक बार उन्हें थाना बुलाया गया, लेकिन आरोपी वहां उपस्थित नहीं हुए। जब वह वापस घर लौट रहे थे, तब रास्ते में कथित रूप से आरोपियों ने फिर उनके साथ मारपीट की और जान से मारने का प्रयास किया। इस घटना की भी उन्होंने लिखित शिकायत संबंधित अधिकारियों को दी, लेकिन अब तक किसी प्रकार की निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई।
धरने पर बैठे संजय गौड़ ने कहा कि वह बेहद गरीब हैं और मजदूरी कर परिवार चलाते हैं।
उनका बेटा दिव्यांग है तथा परिवार के पास रहने के लिए उचित घर भी नहीं है। लगातार न्याय की उम्मीद में कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते वह आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि मजबूर होकर उन्हें अपने दिव्यांग बेटे के साथ प्रखंड परिसर में धरने पर बैठना पड़ा ताकि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंच सके।

आवेदन में उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने तथा उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी लिखा है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह परिवार सहित आत्मघाती कदम उठाने को विवश हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने भी पीड़ित की समस्याओं को सुना और प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक संजय गौड़ अपने दिव्यांग बेटे के साथ प्रखंड परिसर में धरने पर डटे हुए थे और न्याय मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे।













