बड़गांव स्टेट में बनी 1919 ईस्वी में भव्य शिवालय मंदिर जो भक्तों को बरबस खींच कर ले ही चला जाता है। यह मंदिर पौराणिक रूप से विख्यात है।
एन एच 727 बड़गांव चौक से उत्तर में खरपोखरा रोड में लगभग 1किलोमीटर तथा खरपोखरा रेलवे स्टेशन से 4 किलोमीटर की दूरी पर यह मंदिर अवस्थित है।
स्व. बाबू महंत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत से लड़ कर यह कीर्तिमान स्थापित किया है। पौत्र बधू भाजपा नेत्री सुषमा सिंह ने अपने खानदानी पूर्वजों के बनाये गए भव्य प्राचीन शिवालय के निमित्त कुछ जानकारियां साझा करते हुए कहा कि मेरे परिवार के पूर्वजों ने भगवान शंकर के चरणों में अपनी भक्ति की मिसाल पेश कर यह कीर्तिमान स्थापित करते हुए स्व.बाबू महंत सिंह जी ने 1919 ईस्वी सन में बनवाये थे। जो उन्हीं के आशीर्वाद से हमारे परिवार में सुख शांति बनी हुई है।
हर वर्ष महाशिवरात्रि में लगते हैं मेला...
सुषमा सिंह कहती हैं कि महाशिव रात्रि के दिन शिवालय परिसर में हजारों महिलाओं के द्वारा जलाभिषेक किया जाता है।जो आज भी वह रिवाज जिंदा है। ऐसा मान्यता है कि मेले में दर्जनों की तादाद में दुकानें सजती हैं और तो और किसी भी दुकानदार का कोई भी सामान बचता नहीं बिक जाता है। इस दौरान सुषमा सिंह ने कहा अब अकेले ही इस शिवालय की साफ सफाई देख रेख कर औघड़ दानी भोलेनाथ की पूजा अर्चना जलाभिषेक करती हूं। उन्होंने कहा कि
शिव का औघड़ रूप परम वैराग्य, सरलता और सांसारिक बंधनों से मुक्ति का प्रतीक है। औघड़ का अर्थ है जो हर प्रकार के लोक दिखावे,भय, घृणा और भेदभाव से परे हो।सहजता ही अघोर है ! जो व्यक्ति भीतर से जितना ही सरल, शान्त और दिखावे से दूर है,वह उतना ही शिव के औघड़ रूप के करीब है।औघड़ रूप सिखाता है कि परमात्मा को पाने के लिए बाहरी श्रृंगार की नहीं बल्कि भीतर के अहंकार को भस्म करने की आवश्यकता है। शिव का औघड़ रूप वह है जो न विधि देखता है और न विधान , जो सच्चे मन से पुकारे ,उसे अपना सर्वस्व दान कर देता है । इस संदर्भ में मधुबनी प्रखंड हरदेव प्रसाद इंटर कॉलेज मधुबनी के पूर्व प्राचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने कहा कि मेरे सामने इस शिवालय का अद्भुद करिश्मा देखने को मिला है। जिसमें डुमरिया, मेहुड़ा, सिंगाड़ी, परसा बंचहरी, बगहा चखनी, बेलवा डुमरिया, पिपरिया समेत काफी भक्त पहुंचकर औघड़ दानी शिव मंदिर में पूजा अर्चना जलाभिषेक कर दर्शन पाते हैं।



















