दर्शन के वक्त पुरुषों को कमर के ऊपर वस्त्र धारण करने की हैं मनाही
बेतिया।भारत गौरव यात्रा के दौरान सोमबार को तीर्थ यात्रियों ने महाराष्ट्र में अवस्थित श्री घृष्णेश्वर ज्योतिलिंग का दर्शन किया।साथ ही एलोरा की गुफाओं का भम्रण किया।बेतिया के तीर्थ यात्रियों के लिये आज का तीर्थाटन अविस्मरणीय रहा।बताते चले कि श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद जिले में वेरुल नामक गावं के पूर्व में एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित भगवान भोले नाथ के बारह ज्योतिर्लिंगों में से अंतिम ज्योतिर्लिंग है।इस मंदिर का निर्माण 750 ईसवी में हुआ था।यह मंदिर लाल रंग के पत्थरो से बना है जिसका मुख्य प्रवेश द्वार छोटा है।बताया गया है कि मंदिर के गुम्बद पर स्वर्ण कलश स्थापित किया गया है।इस मंदिर की खास विशेषता यह है कि ज्योर्तिलिंग के मुख्य मंदिर में जो भक्त पुरुष प्रवेश करते है उन्हें कमर के ऊपर वस्त्र धारण करने की मनाही है।अतः स्वच्छ मन से धोती या अन्य वस्त्र कमर के नीचे बांधकर भगवान घृष्णेश्वर नाथ की पूजा और दर्शन करने का प्रावधान है।

दर्शन के पूर्व महिलाओं में कनकलता और उनकी टीम की सहेलियों ने शिव के लाचारी सुनाया।कतारबद्ध महिलाओं ने खूब साथ दिया।भजन गीतों और शिव की लाचारी से चार किलोमीटर लंबी कतार और चिलचिलाती धूप और रास्ते मे कंक्रीट की चुभन का पता ही नही चला।महिला श्रद्धालुओ में दर्शन को लेकर बड़ा उत्साह देखा गया। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह भारत गौरव यात्रा ऐतिहासिक रहा।कोच मैन वरुण कुमार का व्यवहार तथा कैटरिंग व्यवस्था सराहनीय रहा।8.45 बजे रात्रि को यह विशेष ट्रेन छत्रपति संभाजी नगर स्टेशन से बेतिया वापसी के लिये रवाना हुआ।



















