बगहा। पिछले कुछ वर्षों से बगहा और आसपास के क्षेत्र के मुसलमानों को ख़ानदानी, निकाह, विरासत तथा अन्य शरीअत से जुड़े मामलों में शरीअत के मुताबिक़ मार्गदर्शन और निर्णय प्राप्त करने के लिए काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अपने मसाइल के समाधान के लिए लोगों को दूर-दराज़ इलाक़ों का रुख़ करना पड़ता था, जिससे समय, धन और असुविधा जैसी कई समस्याएँ सामने आती थीं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अल-मोमिन फ़ाउंडेशन, बगहा ने हज़रत अमीर-ए-शरीअत, पटना की ख़िदमत में एक औपचारिक दरख़्वास्त पेश की।
फ़ाउंडेशन ने मांग की कि पूर्व की भाँति बगहा स्थित मदरसा यतीमख़ाना हारूनिया मोइनिया में दारुल क़ज़ा को पुनः बहाल किया जाए, ताकि स्थानीय मुसलमानों को शरीअत के अनुसार अपने मसाइल का समाधान अपने ही क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध हो सके। अल-मोमिन फ़ाउंडेशन की इस मांग को स्वीकार करते हुए रविवार को हज़रत अमीर-ए-शरीअत ने हज़रत मुफ़्ती हुसैन अहमद क़ासमी को क़ाज़ी-ए-शहर, बगहा नियुक्त करने का ऐलान किया।

उनकी नियुक्ति के साथ ही क्षेत्र में दारुल क़ज़ा की व्यवस्था को पुनः सक्रिय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर अल-मोमिन फ़ाउंडेशन, बगहा की ओर से हज़रत अमीर-ए-शरीअत का दिली शुक्रिया अदा किया गया। फ़ाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि बगहा और आसपास के मुसलमानों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरा कदम है।

उनका मानना है कि अब लोगों को निकाह, तलाक़, विरासत, ख़ानदानी विवाद और अन्य शरीअत से संबंधित मामलों में स्थानीय स्तर पर ही शरीअत के अनुरूप मार्गदर्शन और फ़ैसले प्राप्त हो सकेंगे। फ़ाउंडेशन ने उम्मीद जताई कि दारुल क़ज़ा की पुनर्बहाली से समाज में आपसी विवादों का समाधान तेज़ी और पारदर्शिता के साथ होगा तथा लोगों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे। साथ ही शरीअत के मामलों में स्थानीय स्तर पर भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध होने से आम लोगों को बड़ी सहूलियत मिलेगी।

इस मौके पर अल-मोमिन फ़ाउंडेशन के सद्र जावेद अली अख़्तर, सेक्रेटरी मोहम्मद ईमरान मोमिन, स्पोक्सपर्सन तुफैल अहमद, मोहम्मद मुर्तज़ा, अब्दुल माजिद ख़ान, अंसारी आफ़ताब, कैफ़ अनवर, अकरमुल नवाब, लुक़मान मोमिन, ज़ैद, सूफ़ियान मलिक, मौलाना अब्दुल वहाब काश्मी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के मुसलमानों के हित में एक दूरगामी और सकारात्मक पहल बताया।



















