बड़ोदरा, गुजरात में पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने पावागढ़ शक्तिपीठ एवं किला का भ्रमण करते हुए कहा कि मन्त्रों के सही उच्चारण, विधि और गुप्त रहस्य का वास्तविक ज्ञान (अपरिज्ञान) न होने के कारण मंत्र अपनी शक्ति खो चुके हैं (नष्टप्राय हो गए हैं)। लोग बिना नियम, संयम और बिना व्रत-उपवास के ही योग या साधना का ढोंग करते हैं, जिससे वे साधन निष्फल हो जाते हैं। (कलियुग के प्रभाव से) देवताओं की आशीर्वाद देने की और मनोकामनाएं पूरी करने की शक्ति अंतर्धान (तिरोहित/लुप्त) हो गई है। ऐसी असहाय स्थिति में माता श्री ही मेरी एकमात्र गति, सहारा और आश्रय हैं।_
जब साधना के साधन (ज्ञान, मंत्र, व्रत, योग) अपनी शुद्धता और सार खो दें, और मनुष्य भ्रमित हो जाए, तब ईश्वर की शरण ही एक मात्र सुरक्षित मार्ग है।
इस अवसर पर हंस पूर्व प्रधानाचार्य पंडित रमाशंकर तिवारी,जलेसर तिवारी,सोनू तिवारी,आकाश मिश्रा,दिव्यांश तिवारी उपस्थित रहे।













