बगहा। पश्चिम चंपारण के बगहा में गोरखपुर–नरकटियागंज रेलखंड पर स्थित तिरहुत नगर रेलवे पुल संख्या 349 के पास घायल अवस्था में मिली एक दुर्लभ फिशिंग कैट का वन विभाग ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसकी जान बचा ली। पहले स्थानीय लोगों ने उसे तेंदुए का शावक समझ लिया था, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग और रेलवे प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। कई घंटे चले अभियान के बाद फिशिंग कैट को सुरक्षित पकड़कर उपचार के लिए भेज दिया गया।


पर्यावरण प्रेमी गजेंद्र यादव ने बताया कि सोमवार शाम विकास वैभव चौक के पास तेंदुए के शावक जैसे एक वन्यजीव के दिखाई देने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और देर रात करीब 11 बजे तक खोज अभियान चलाया। हालांकि अंधेरा और वन्यजीव के लगातार स्थान बदलने के कारण टीम को सफलता नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने मंगलवार सुबह दोबारा रेस्क्यू अभियान चलाने का निर्णय लिया। मंगलवार सुबह स्थानीय लोगों ने रेलवे पुल संख्या 349 के पास उसी वन्यजीव को घायल अवस्था में देखा। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम फिर मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि जिसे ग्रामीण तेंदुए का शावक समझ रहे थे, वह वास्तव में एक वयस्क फिशिंग कैट थी। यह दुर्लभ वन्यजीव अपनी शर्मीली प्रकृति के कारण बहुत कम दिखाई देता है।

रेस्क्यू अभियान के दौरान वन कर्मी चंदेश्वर चौधरी और गुड्डू चौधरी मामूली रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल बगहा अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉ. अरुण कुमार यादव ने उनका उपचार किया। चिकित्सकों के अनुसार दोनों को गंभीर चोट नहीं आई है और प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति सामान्य है।
बगहा के रेंजर श्रीमान मालकर ने बताया कि फिशिंग कैट की कमर में चोट के निशान मिले हैं। आशंका है कि वह किसी ट्रेन की हल्की चपेट में आने से घायल हुई होगी या तेज रफ्तार ट्रेन के कारण उसे आघात पहुंचा होगा। फिलहाल उसका उपचार विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

वहीं, बगहा रेलवे स्टेशन के एसएस संतोष पांडेय ने बताया कि वन्यजीव के घायल होने की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन ने तत्काल सभी ट्रेनों को उस क्षेत्र से सावधानीपूर्वक धीमी गति से चलाने और आवश्यकता पड़ने पर रोकने के निर्देश जारी किए थे। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद रेल परिचालन सामान्य कर दिया गया।वन विभाग, रेलवे प्रशासन और स्थानीय लोगों के समन्वय से एक दुर्लभ वन्यजीव की जान बच सकी। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रशासन की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि आम लोगों में बढ़ती पर्यावरणीय जागरूकता का भी सकारात्मक संदेश देती है।












