बगहा। सीमावर्ती क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में 65वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), बेतिया ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत ग्राम डुमरी में एक माह के ब्यूटीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को व्यावसायिक कौशल प्रदान कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।


कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम ने किया। यह प्रशिक्षण 31 जुलाई से 5 सितंबर 2026 तक राजकीयकृत मध्य विद्यालय, डुमरी में संस्कृति फाउंडेशन, रामनगर के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इसमें सीमावर्ती क्षेत्र की 25 महिलाओं को ब्यूटीशियन के क्षेत्र में व्यावहारिक एवं आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे भविष्य में स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 65वीं वाहिनी के कमांडेंट नंदन सिंह मेहरा ने कहा कि एसएसबी केवल सीमाओं की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से पूरी लगन और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण लेने तथा इसे अपने उज्ज्वल भविष्य का आधार बनाने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि मंत्री नंदकिशोर राम ने एसएसबी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि कौशल विकास महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के समय में स्वरोजगार ही आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों की महिलाओं के लिए नए अवसर तैयार करते हैं।

प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने भी इस पहल पर खुशी जताई। उनका कहना था कि इस प्रशिक्षण से उन्हें नया हुनर सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे वे भविष्य में अपना ब्यूटी पार्लर शुरू कर परिवार की आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि पंकज झुनझुनवाला, भाजपा जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी, मुखिया धीरज कुमार देवनाथ, सरपंच गोपाल देवनाथ, बीडीसी मनोज कुमार, उप कमांडेंट नीलकांत, सहायक कमांडेंट राहुल, एसएसबी के अधिकारी एवं जवान, संस्कृति फाउंडेशन के प्रतिनिधि, स्थानीय ग्रामीण और बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी महिलाएं उपस्थित रहीं।

एसएसबी की यह पहल सीमावर्ती महिलाओं के लिए केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, रोजगार और सम्मान की नई शुरुआत है। इससे महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिलेगा और सीमावर्ती गांवों में महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।



















