बगहा। नेपाल और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बगहा अनुमंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। सरकार जहां जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों से अनावश्यक रेफरल रोकने पर जोर दे रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर मरीजों को लगातार उच्च संस्थानों में भेजे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों में असंतोष बढ़ रहा है।
सोमवार को सांस लेने में गंभीर परेशानी से जूझ रहे एक मरीज को इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उच्च संस्थान रेफर कर दिया। इस घटना के बाद अस्पताल की रेफरल व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

इधर, स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बावजूद अस्पताल में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का प्रभावी पालन नहीं होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि एक विशेषज्ञ चिकित्सक सप्ताह में केवल 24 घंटे ही अस्पताल में ड्यूटी करते हैं और अधिकांश समय मुख्यालय से बाहर रहते हैं। इससे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. ए.के. तिवारी ने कहा कि सभी चिकित्सकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिन मरीजों का इलाज अनुमंडलीय अस्पताल में संभव है, उनका यहीं समुचित उपचार किया जाए।

केवल गंभीर और उच्चस्तरीय चिकित्सा की आवश्यकता वाले मरीजों को ही रेफर किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रबंधन सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य कर रहा है। बायोमेट्रिक उपस्थिति समेत सभी व्यवस्थाओं के पालन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मरीजों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके, लगातार उठ रहे सवालों के बीच अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।












