बगहा। खरीफ सीजन में किसानों को समय पर और निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कृषि पदाधिकारी के निर्देश पर सोमवार को प्रखंड कृषि कार्यालय, बगहा-1 के सभागार में प्रखंड स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि परसा बैठा की अध्यक्षता में हुई बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, कालाबाजारी पर रोक और किसानों की समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों और भाजपा, जदयू, राजद एवं कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्षों ने किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने और कुछ दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूले जाने का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कई किसान खाद के लिए भटक रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कृत्रिम अभाव पैदा कर मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायतें मिल रही हैं। इस दौरान अधिकारियों और उर्वरक विक्रेताओं के बीच कुछ देर तक तीखी बहस भी हुई। हालांकि, अधिकारियों के हस्तक्षेप और निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।

प्रखंड कृषि पदाधिकारी अभय मिश्रा ने सभी लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं, कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों को स्पष्ट निर्देश दिया कि खाद की बिक्री केवल सरकारी निर्धारित दर पर ही की जाए। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी, टैगिंग, स्टॉक छिपाने या किसानों से अधिक कीमत वसूलने जैसी शिकायतें मिलने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध लाइसेंस निलंबन सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रत्येक बिक्री की रसीद देना और स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से अद्यतन रखने का निर्देश भी दिया गया।

बैठक में मौजूद प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रदीप कुमार ने कहा कि किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार उर्वरक दुकानों की निगरानी करेगा और यदि किसी भी दुकान पर अनियमितता या कालाबाजारी की शिकायत सही पाई गई तो तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि कोई दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले या खाद देने में आनाकानी करे तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग या प्रशासन को दें।

बैठक में प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी तथा सभी लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेता मौजूद रहे। अंत में समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि किसानों तक पर्याप्त मात्रा में, समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि खरीफ फसलों की खेती किसी भी तरह प्रभावित न हो।














