बगहा : नगर परिषद में नाला निर्माण के दौरान भारी घोटाले की पुष्टि हुई है। उसके जांच में गंभीर अनियमितताएं भी मिली है। अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में परिवाद के बाद
घटिया निर्माण, प्राक्कलन में गड़बड़ी, अधिकारियों व संवेदक की मिलीभगत के संकेत का खुलासा हुआ है। जिसके आलोक में अधिकारी ने निर्माण कार्य का भुगतान रोकने व कार्रवाई का आदेश दिया है।
बगहा नगर परिषद के वार्ड संख्या तीन में अजीज खान के घर से पिपरा ढाला तक चल रही नाला निर्माण योजना (ग्रुप संख्या-06/2025-26) में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल, प्राक्कलन में भारी गड़बड़ी, गुणवत्ता मानकों की अनदेखी तथा अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है।
यह मामला पटखौली वार्ड संख्या तीन निवासी राहुल कुमार मिश्रा की शिकायत पर सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पूर्व निर्मित नाली पर सिर्फ दो ईंट जोड़कर स्लैब डाल दिया गया और निर्माण में दो नंबर ईंट व घटिया बालू का उपयोग किया गया। शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों से प्रतिवेदन मांगा गया। जांच के दौरान नगर परिषद की ओर से दावा किया गया कि कार्य गुणवत्तापूर्ण कराया गया व शिकायतकर्ता संतुष्ट हैं, लेकिन इसका कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। बाद में योजना की संचिका व अभिलेखों की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं।
जांच में पता चला कि करीब 24.23 लाख रुपये की इस योजना का कार्यादेश संवेदक रामजी सहनी को दिया गया था। जिसमें कनीय अभियंता प्रदीप कुमार को निर्माण कार्य की निगरानी व गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन रिकॉर्ड में उनके किसी निरीक्षण, जांच या गुणवत्ता परीक्षण का प्रमाण नहीं मिला।
भवन निर्माण विभाग के कनीय अभियंता द्वारा कराए गए भौतिक निरीक्षण में भी कई खामियां मिलीं। प्राक्कलन के अनुसार नाले की आरसीसी स्लैब की चौड़ाई तीन फीट होनी थी, जबकि मौके पर यह दो फीट सात इंच से दो फीट 10 इंच तक ही पाई गई। कई स्थानों पर आरसीसी में हनीकॉम्ब मिला तथा नाले में उचित ओपनिंग नहीं होने के कारण सड़क पर जलजमाव की समस्या भी पाई गई।
जांच में यह भी सामने आया कि योजना में प्रयुक्त ईंट, बालू, सीमेंट व गिट्टी की खरीद का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। मजदूरों का मास्टर रोल भी संचिका में नहीं मिला। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब पांच हजार रुपये की बालू के लिए तीन लाख 57 हजार रुपये से अधिक व करीब 34 सौ 55 रुपये की गिट्टी के लिए दो लाख दो हजार रुपये परिवहन मद में खर्च किया गया, जबकि परिवहन का कोई प्रमाण भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन तथ्यों से संवेदक, कनीय अभियंता व कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में है तथा योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितता बरती गई है।
--------------
जांच के बाद क्या है प्रमुख निर्देश : लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने निर्देश दिया है कि संवेदक को भुगतान से पहले थर्ड पार्टी से तकनीकी जांच कराई जाए। बालू व गिट्टी के परिवहन मद की राशि काटी जाए। शेष भुगतान में भी 10 प्रतिशत कटौती की जाए।
कनीय अभियंता प्रदीप कुमार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप पत्र भेजा जाए। नगर परिषद की योजनाओं की निगरानी जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी से कराने की अनुशंसा की गई। साथ ही
आदेश की प्रति बेतिया जिला पदाधिकारी, स्थापना उपसमाहर्ता, प्रधान सचिव शहरी विकास एवं आवास विभाग व विभागीय मंत्री को भेजने का निर्देश दिया गया।
इस जांच रिपोर्ट के बाद नगर परिषद में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन व गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि अनुशंसाओं पर कार्रवाई होती है तो यह मामला नगर परिषद के निर्माण कार्यों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।













