बगहा। मानसून की बारिश ने एक बार फिर बगहा नगर की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। पिछले सप्ताह से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बाद एनएच-727 के बगहा-बेतिया मार्ग स्थित रत्नमाला मोड़ पर दोबारा जलजमाव हो गया। सड़क पर पानी भर जाने से राहगीरों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ दिन पहले राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) विभाग और नगर परिषद ने संयुक्त अभियान चलाकर यहां से पानी की निकासी कराई थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण बारिश के साथ ही समस्या फिर लौट आई।


स्थानीय निवासी विजय कुमार पांडे, अविनाश पांडे, फरहान अहमद और प्रशांत मिश्रा का कहना है कि हर वर्ष यही स्थिति बनती है। मशीनों से पानी निकालकर कुछ घंटों या कुछ दिनों की राहत तो मिल जाती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि एनएच की कई नालियां क्षतिग्रस्त हैं, कई जगह उनका सही मिलान नहीं है और जल निकासी का समुचित मार्ग भी विकसित नहीं किया गया है। नतीजतन बारिश का पानी सीधे सड़क पर जमा हो जाता है। रत्नमाला मोड़ ही नहीं, नगर के कई अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। वार्ड संख्या-31 से होकर वार्ड संख्या-30 जाने वाली सड़क पर स्वर्गीय डॉ. रिजवान के घर के समीप नाला जाम होने से एक से डेढ़ फीट तक पानी जमा है। इसके अलावा प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय मार्ग, रामधाम मंदिर रोड तथा वार्ड संख्या-29 और 30 में भी जलभराव के कारण लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद शायद ही नगर का कोई वार्ड ऐसा बचता हो, जहां जलजमाव की समस्या न हो।

कुछ दिन पूर्व एसडीएम चांदनी कुमारी ने अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नालों की सफाई और खुदाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर अब भी समुचित सफाई नहीं हो सकी है, जिससे हालात में अपेक्षित सुधार नहीं आया। इस मामले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा ने कहा कि एनएच विभाग की नालियों से पानी की निकासी बाधित होने के कारण समस्या बनी हुई है। लगातार बारिश के चलते फिलहाल स्थायी कार्य संभव नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वर्षा समाप्त होने के बाद जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, हर बारिश के साथ बगहा के लोगों को जलजमाव, जाम और आवागमन की परेशानी झेलनी पड़ रही है। नगरवासियों का कहना है कि अस्थायी उपायों के बजाय यदि नालों की मरम्मत, बेहतर ड्रेनेज नेटवर्क और स्थायी जल निकासी व्यवस्था पर काम नहीं हुआ, तो हर मानसून में यही तस्वीर दोहराई जाती रहेगी।












