बगहा। नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 24 स्थित मस्तान टोला के पशु अस्पताल परिसर और वार्ड संख्या 27 के बीआरसी परिसर में वर्षों से जलजमाव की समस्या बनी हुई है। कई वार्डों का गंदा पानी इन स्थानों पर जमा होने के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पशु अस्पताल और बीआरसी परिसर धीरे-धीरे स्थायी जलाशय का रूप लेते जा रहे हैं। गंदे पानी के लंबे समय तक जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। इसके चलते डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। आसपास के परिवारों को दुर्गंध और मच्छरों के कारण रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार नगर परिषद और संबंधित विभागों को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में जलजमाव इतना बढ़ जाता है कि आसपास के क्षेत्रों में रहना मुश्किल हो जाता है। वार्ड संख्या 27 की पार्षद सबीना खातून ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। हालांकि, ज्ञापन दिए जाने के बाद भी अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हुई है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।

स्थानीय निवासी विनोद नारायण साह, सुशील कुमार श्रीवास्तव, मनीष कुमार और जियाउल हक ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि गंदगी और मच्छरों के कारण बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। जलजमाव की समस्या के साथ-साथ लोगों ने नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मुख्य चौक-चौराहों को छोड़ अधिकांश वार्डों में सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। मुंबई बाजार रोड समेत कई इलाकों में कूड़े के ढेर लगे रहते हैं, जहां आवारा पशु भोजन तलाशते नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि सफाई कार्य की प्रभावी निगरानी नहीं होने से शहर की स्वच्छता व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है।
गौरतलब है कि नगर की सफाई व्यवस्था फिलहाल एक निजी एजेंसी के जिम्मे है। वहीं करीब 55 लाख रुपये की लागत से दूसरी एजेंसी को भी सफाई कार्य सौंपने की तैयारी चल रही है। ऐसे में शहरवासियों की नजर नई व्यवस्था पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि नई एजेंसी के आने से सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और जलजमाव जैसी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
इस संबंध में नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी अब्दुल बाकी ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। स्थल निरीक्षण के बाद जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पशु अस्पताल परिसर पशुपालन विभाग के अधीन आता है, फिर भी नगर परिषद स्तर से जरूरी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। फिलहाल स्थानीय लोग जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।












