बगहा। बगहा अनुमंडलीय अस्पताल के आपातकाल (इमरजेंसी) वार्ड में इन दिनों मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भीषण उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड में लगे सभी एयर कंडीशनर (AC) खराब हो जाने के कारण भर्ती मरीजों, उनके परिजनों, चिकित्सकों, जीएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की परेशानी लगातार बढ़ गई है। गर्मी के कारण मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है, जबकि गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान भी प्रतिकूल माहौल बना हुआ है। इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए आने वाले मरीजों का कहना है कि गर्मी और उमस के कारण उनकी तकलीफ और बढ़ जाती है। कई मरीजों के स्वजन हाथ से पंखा झलकर अपने परिजनों को राहत देने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल की सबसे महत्वपूर्ण इकाई इमरजेंसी वार्ड होती है, जहां हर समय गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है। ऐसे में एयर कंडीशनर का बंद रहना चिंता का विषय है।

स्वास्थ्यकर्मियों का भी कहना है कि लगातार उमस भरे वातावरण में काम करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मरीजों की देखभाल के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के कारण वार्ड का वातावरण असहज बना हुआ है, जिससे मरीजों के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र में स्थित बगहा अनुमंडलीय अस्पताल पूरे अनुमंडल के सात प्रखंडों की बड़ी आबादी के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से इमरजेंसी वार्ड में गंभीर मरीजों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में एयर कंडीशनिंग व्यवस्था ठप होने से अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि खराब पड़े सभी एयर कंडीशनरों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके और इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस संबंध में अस्पताल प्रबंधक मोहम्मद शाहनवाज ने बताया कि क्षेत्र में लगातार लो वोल्टेज और बिजली की समस्या के कारण इमरजेंसी वार्ड के एयर कंडीशनर खराब हो गए हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नीशियन को इसकी सूचना दे दी गई है और मरम्मत का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन का प्रयास है कि सभी एसी को शीघ्र चालू कर इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था सामान्य कर दी जाए, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों को राहत मिल सके।













