अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ मारपीट का वीडीओ वायरल
बगहा। अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर बुधवार को पूरे बिहार में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया गया। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा से सटे बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में भी चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा बंद रखी। हालांकि मानवता के आधार पर अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं और गंभीर मरीजों का इलाज जारी रखा गया।



दरअसल, अरवल सदर अस्पताल में सदर प्रखंड के फखरपुर गांव की गर्भवती महिला रागिनी कुमारी को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। सामान्य प्रसव संभव नहीं होने पर डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन किया, लेकिन ऑपरेशन के बाद महिला की मौत हो गई। इसके बाद आक्रोशित परिजनों और अन्य लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। आरोप है कि इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. राज किशोर प्रसाद के साथ भी मारपीट की गई और उन्हें गर्दन पकड़कर जमीन पर पटक दिया गया, जिससे वे घायल हो गए। उनका इलाज जारी है।


घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से पूर्व विधायक सहित 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। चिकित्सकों का आरोप है कि अब तक आरोपितों के खिलाफ संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ ने पूरे राज्य में एक दिन के लिए ओपीडी सेवा बंद रखने का निर्णय लिया। बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में ओपीडी बंद रहने से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 30 से 35 किलोमीटर दूर से आए मरीजों को बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ा। अस्पताल का पंजीकरण काउंटर भी बंद रहा, जिससे नई पर्ची नहीं बन सकी। इलाज, बच्चों के टीकाकरण और अन्य सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।



हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं। गंभीर मरीजों का इलाज, भर्ती मरीजों की देखभाल और इमरजेंसी वार्ड की सभी सेवाएं पहले की तरह जारी रहीं। तिरहुत प्रमंडल बिहार हेल्थ सर्विस एसोसिएशन के सचिव एवं अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि अरवल में सिविल सर्जन के साथ हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे माहौल में चिकित्सकों के लिए सुरक्षित वातावरण में काम करना मुश्किल होता जा रहा है।

चिकित्सकों ने कहा कि मरीजों को परेशान करना उनका उद्देश्य नहीं है। जिन मरीजों की स्थिति गंभीर थी, उनका इलाज इमरजेंसी में लगातार किया गया। उन्होंने कहा कि ओपीडी सेवा केवल एक दिन के लिए बंद की गई है और गुरुवार से अस्पताल में सामान्य रूप से ओपीडी सेवा फिर शुरू हो जाएगी। चिकित्सकों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।












