रामनगर। प्रखंड के धानरपा गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गांव के एक तालाब में अचानक मगरमच्छ दिखाई दिया। देखते ही देखते मगरमच्छ की खबर पूरे गांव में फैल गई और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। तालाब के आसपास रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल बन गया। लोगों ने एहतियात के तौर पर बच्चों और मवेशियों को तालाब के पास जाने से रोक दिया, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए मगरमच्छ को पकड़ने या भगाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही रामनगर वन प्रक्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सुरक्षित कर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। वनकर्मियों ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम को देखते रहे। रामनगर के रेंजर विजय प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल धानरपा गांव पहुंची। प्रशिक्षित टीम ने सावधानीपूर्वक मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू किया। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ पूरी तरह सुरक्षित था, इसलिए उसे उसके प्राकृतिक आवास गंडक नदी में छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान किसी प्रकार की जनहानि या अप्रिय घटना नहीं हुई।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी गांव या आबादी वाले क्षेत्र में मगरमच्छ अथवा अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो घबराने या उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें। ऐसे मामलों में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर सके। विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने और जलधाराओं का स्वरूप बदलने के कारण मगरमच्छ सहित कई जलीय जीव आसपास के तालाबों और जलाशयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे समय नदी और तालाब के किनारे रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
मगरमच्छ के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद धानरपा गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर टीम के पहुंचने से एक बड़ा हादसा टल गया। अब पूरे इलाके में स्थिति सामान्य है, जबकि वन विभाग लोगों को लगातार जागरूक रहने और किसी भी वन्यजीव की सूचना तत्काल देने की सलाह दे रहा है।



















