बेतिया। शिक्षक दिवस के मौके पर शनिवार को पश्चिम चंपारण समाहरणालय सभागार में शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिले के अलग-अलग विद्यालयों में बेहतर कार्य और उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को इस दौरान प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर शिक्षकों के चेहरे पर खुशी नजर आई।
कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह, अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिन्हा, अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अनिल कुमार सिन्हा, विशेष कार्य पदाधिकारी सुजीत कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार समेत शिक्षा विभाग के सभी डीपीओ और शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

समारोह में प्राथमिक विद्यालयों के 22 शिक्षक, मध्य विद्यालयों के 9, माध्यमिक विद्यालयों के 9 और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के 13 शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। इसके अलावा पांच कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की वार्डेन को भी उनके योगदान के लिए सम्मान दिया गया।

जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनका काम सिर्फ बच्चों को किताबों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सोच, अनुशासन और संस्कार को मजबूत करना भी है। शिक्षक बच्चों के भविष्य को दिशा देने के साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि कक्षा में शिक्षक द्वारा विकसित किया गया ज्ञान और आत्मविश्वास विद्यार्थियों के जीवन में लंबे समय तक प्रभाव डालता है।

ऐसे में शिक्षकों को अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए। जिला पदाधिकारी ने शिक्षकों से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में अलग क्षमता होती है। शिक्षकों को उनकी प्रतिभा पहचानकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। सम्मानित शिक्षकों के बेहतर कार्यों और नवाचारों को दूसरे विद्यालयों में भी अपनाने की जरूरत है, ताकि जिले की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।

समारोह के दौरान महान शिक्षाविद एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। अधिकारियों और शिक्षकों ने उनके शिक्षा क्षेत्र में योगदान को याद किया। कार्यक्रम में सम्मानित शिक्षकों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा देने तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए आगे भी पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने का संकल्प लिया।



















