बगहा। रामनगर के चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में करीब चार साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए पांच आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, मुशहर और गीता देवी शामिल हैं। अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामला रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से जुड़ा है। घटना 1 मई 2022 की है।
मृतक विजय सहनी की पत्नी आशा देवी की शिकायत पर 4 मई को रामनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, विजय सहनी को पोखरा से जुड़े विवाद को सुलझाने के बहाने फोन कर बुलाया गया था। इसके बाद वह बाइक लेकर घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। बाद में पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू हुई। घटना के करीब सात दिन बाद महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया।
शव की पहचान अंगूठी और घड़ी के आधार पर की गई।

अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, पुत्र राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख रहे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बरामद मोबाइल फोन और बाइक समेत अन्य साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, संपत्ति के लालच में विजय सहनी की बहन गीता देवी ने हत्या की साजिश रची थी और इसमें अन्य आरोपितों की भूमिका सामने आई। लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने अदालत के फैसले की जानकारी दी। मामले में मुख्य आरोपी अशोक यादव को भी अदालत दोषी करार दे चुकी है। उसकी सजा की अवधि को लेकर अदालत 11 सितंबर को फैसला सुनाएगी।
करीब चार साल पुराने इस चर्चित हत्याकांड में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। संपत्ति विवाद से जुड़े इस मामले में अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



















