गौनाहा (पश्चिम चंपारण) में फिल्म अभिनेता और पद्मश्री सम्मानित मनोज बाजपेयी सोमवार को भितिहरवा स्थित जीवन कौशल ट्रस्ट के आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने विभिन्न गांवों की बच्चियों को दिए जा रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली और आश्रम में संचालित गतिविधियों का जायजा लिया।
उन्होंने ट्रस्ट के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की कौशल आधारित शिक्षा से ही ग्रामीण समाज का समग्र विकास संभव है और यह प्रयास समाज के पिछड़े वर्गों के लिए सराहनीय है।
इस दौरान उन्होंने आश्रम में चरखा चलाया और कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी चरखे को आत्मनिर्भरता, अहिंसा और शांति का प्रतीक मानते थे। चरखा चलाना मानसिक शांति, धैर्य और संयम विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।
आश्रम परिसर में दो वर्ष पूर्व उनके द्वारा लगाए गए रुद्राक्ष पौधे के विकास को देखकर उन्होंने संतोष जताया और कहा कि पौधारोपण के साथ-साथ उसका संरक्षण भी जरूरी है।
इससे पहले उन्होंने डीएम तरनजोत सिंह और एसपी डॉ. शौर्य सुमन से मुलाकात कर चंपारण की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और नई पीढ़ी को उससे जोड़ने के मुद्दे पर चर्चा की।
यात्रा के क्रम में वे कस्तूरबा कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय भितिहरवा भी पहुंचे, जहां उनके माता-पिता की स्मृति में स्थापित गीता-राधाकांत बाजपेयी स्मृति पुस्तकालय का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने छात्राओं से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली।
विद्यालय के प्राचार्य सुधीष्ट कुमार ने उन्हें विद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराया। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह, सचिव प्रो. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी और कोषाध्यक्ष राकेश राव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोत जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। आधिकारिक पुष्टि, दस्तावेज या जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।

