
रामनगर। बगहा अनुमंडल के रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, प्रशासनिक लापरवाही और मरीजों के शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। शुक्रवार की रात बिहार सरकार के डेयरी एवं मत्स्य विभाग मंत्री सह स्थानीय विधायक नंदकिशोर राम के औचक निरीक्षण में अस्पताल की अव्यवस्था की परतें खुलकर सामने आ गईं। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मंत्री के तीखे सवालों के सामने असहज नजर आए। मंत्री ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, परिसर और आवश्यक सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान अस्पताल परिसर में चारों ओर गंदगी फैली मिली तथा साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दी। मरीजों के बिस्तरों पर बिछी चादरों की हालत देखकर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चादरों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो महीनों से उनकी धुलाई नहीं हुई हो। ऐसी स्थिति न केवल स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी है, बल्कि मरीजों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। निरीक्षण के दौरान जब मंत्री अस्पताल के शौचालयों तक पहुंचे तो वहां की स्थिति और भी भयावह मिली। दुर्गंध और गंदगी से भरे शौचालयों को देखकर उन्होंने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। मंत्री ने कहा कि शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि वहां कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल है। ऐसे वातावरण में मरीजों का उपचार होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अस्पताल की अव्यवस्था केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रही। निरीक्षण के दौरान आर्थिक अनियमितताओं का मामला भी सामने आया। मंत्री ने बताया कि क्षेत्र के लोगों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ओपीडी में आने वाले गरीब मरीजों से रजिस्ट्रेशन पर्ची के नाम पर निर्धारित दो रुपये के सरकारी शुल्क के बजाय पांच रुपये की वसूली की जा रही है। उन्होंने इस अवैध वसूली को गरीब मरीजों के साथ अन्याय और शोषण बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही। साथ ही स्पष्ट संकेत दिया कि इस गड़बड़ी में शामिल कर्मियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था, लापरवाही और कथित लूट-खसोट के लिए सीधे तौर पर पीएचसी प्रभारी डॉ. डीएस आर्या तथा पीएचसी मैनेजर को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की उदासीनता के कारण अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जिला पदाधिकारी और सिविल सर्जन को दोनों अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की लिखित अनुशंसा भेजने की बात कही। गौरतलब है कि निरीक्षण के समय पीएचसी प्रभारी डॉ. डीएस आर्या अस्पताल में मौजूद थे और उन्हें मंत्री के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। इस दौरान भाजपा नेता प्रमोद साह, गगन प्रसाद, दीपक दुबे, पंकज झुनझुनवाला सहित कई स्थानीय सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। मंत्री की कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।















