पश्चिमी चंपारण में यूरिया की कमी को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जिला कृषि पदाधिकारी बेतिया द्वारा ग्रामीण इलाकों में एक दिन में पांच बोरा यूरिया की बिक्री पर प्रतिबंध और सीमित वितरण के आदेश से स्थिति और गंभीर हो गई है।
किसानों का कहना है कि बिस्कोमान सहित खाद दुकानों पर यूरिया उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। गन्ना उत्पादक किसान खास तौर पर प्रभावित हैं, क्योंकि इस समय फसल के लिए उर्वरक की जरूरत अधिक होती है।
विभागीय आदेश के अनुसार बिस्कोमान केंद्रों पर प्रतिदिन केवल 10 बोरा यूरिया बेचने की अनुमति है। वहीं खुदरा दुकानदारों को स्टॉक जांच पूरी होने तक वितरण रोकने और उसके बाद भी एक दिन में मात्र पांच बोरा ही बेचने का निर्देश दिया गया है। इससे किसानों को जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रहा है।
मामले को लेकर वाल्मीकिनगर विधायक सुरेन्द्र प्रसाद ने जिला कृषि पदाधिकारी को पत्र लिखकर आदेश को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गन्ना फसल को यूरिया की अत्यधिक जरूरत होती है और बिक्री पर नियंत्रण व्यावहारिक नहीं है।
इसी बीच गन्ना किसानों को तीन माह की अनुदान राशि भी नहीं मिली है। राज्य सरकार की ओर से 10 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दी जाने वाली राशि का भुगतान एक जनवरी से चीनी मिल बंद होने तक अब तक नहीं किया गया है। विधायक ने डीएम और एसडीएम से बकाया भुगतान जल्द कराने का अनुरोध किया है।
रामनगर प्रखंड परिसर स्थित इफको बाजार में मंगलवार को यूरिया के लिए लंबी कतारें देखी गईं। भीड़ को देखते हुए पुलिस की निगरानी में वितरण कराया गया, जहां एसआइ फारूक आजम पुलिस बल के साथ मौजूद थे। किसानों के आधार कार्ड पर न्यूनतम एक बोरा और अधिकतम दो बोरा यूरिया निर्धारित किया गया है।
कृषि पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने कहा कि यूरिया की कोई कमी नहीं है और सभी किसानों तक खाद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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