
बगहा। पश्चिमी चंपारण के जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह के निर्देश पर जिले भर में अवैध अस्पतालों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत बुधवार की सुबह बगहा नगर थाना क्षेत्र के गांधी नगर चौक स्थित जीवन ज्योति हॉस्पिटल में छापेमारी की गई। प्रशासनिक टीम ने अस्पताल के वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, दवा दुकान समेत सभी कक्षों की गहन जांच की। जांच के दौरान अस्पताल संचालक नीरज तिवारी से संचालन से संबंधित वैध कागजात मांगे गए, लेकिन वे कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट हो गया कि अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित किया जा रहा था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि यहां सीजेरियन ऑपरेशन भी किए जा रहे थे। मौके पर पांच महिला मरीज भर्ती मिलीं, जिनका हाल ही में ऑपरेशन हुआ था। टीम ने मरीजों को सुरक्षित बगहा अनुमंडलीय अस्पताल भेजने के लिए दो एंबुलेंस भी बुलवाई। हालांकि मरीजों और उनके परिजनों ने वहां जाने से इंकार कर दिया, जिससे अस्पताल को तत्काल सील करने की कार्रवाई रोकनी पड़ी। बिगड़ते माहौल को देखते हुए टीम ने स्थिति को नियंत्रित किया और आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया।
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। अस्पताल में मिले प्रिस्क्रिप्शन पर अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सक सर्जन डॉ. विजय कुमार, डॉ. बालेश्वर कुमार शर्मा तथा डॉ. शैलेंद्र कुमार जायसवाल के नाम अंकित पाए गए। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मौके पर इनमें से कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। अब इन नामों के इस्तेमाल को लेकर भी जांच की जा रही है। टीम ने पाया कि अस्पताल में न तो कोई योग्य डॉक्टर मौजूद था और न ही प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ। इसके अलावा इलाज के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। अस्पताल परिसर में संचालित दवा दुकान के पास भी कोई वैध लाइसेंस नहीं मिला।
बीडीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि जिला पदाधिकारी के निर्देश पर की गई इस जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
छापेमारी टीम में हरनाटांड पीएचसी प्रभारी डॉ. के.बी.एन सिंह, बीडीओ प्रदीप कुमार, डाटा ऑपरेटर जीतेश्वर प्रसाद और नगर थाना के एएसआई एकतेदार अहमद समेत अन्य पुलिस बल मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि बगहा अनुमंडल क्षेत्र में कई ऐसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनके पास वैध कागजात नहीं हैं। इस कार्रवाई के बाद ऐसे अस्पतालों पर शिकंजा कसने की उम्मीद बढ़ गई है।







